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हरिप्रसाद चौरसिया जी का बांसुरी वादन

 हरिप्रसाद चौरसिया जी का बांसुरी वादन

अगस्त सन २०१६ की एक सुबह सूर्य की सुनहरी किरणें हमारे दिल्ली पब्लिक स्कूल, बैंगलौर उत्तर के प्रांगण में एक अलौकिक सुगंध के साथ अवतरित हुई । प्रख्यात एवं महान बाँसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया जी ने अपने बहुमूल्य समय में से कुछ पल हमें प्रदान कर उस प्रभात को हमारे जीवन में एक अविस्मरणीय पल के रूप में अंकित कर दिया।

पंडित जी देश के बाँसुरी के पर्याय हैं। इन्होंने अपने जीवन में अनेक मंचों से शास्त्रीय संगीत की विजय पताका स्थापित की है। आपने अपनी शर्तों पर कुछ फिल्मों में भी मधुर संगीत का योगदान दिया है। इनकी प्रतिष्ठा देश में ही नहीं विदेशों में भी अपने चरम पर है। पंडित जी का हमारे विद्‍यालय में अपनी कला को प्रस्तुत करने का निर्णय, हमारे स्कूल के लिए ही नहीं अपितु उद्‍यानों के इस शहर बैंगलौर की प्रतिष्ठा का विषय है। इस कार्यक्रम को सुनने के लिए हमारे विद्‍यालय में केंद्रीय विद्‍यालय यलहंका, जवाहर नवोदय विद्‍यालय बागलूर, यशस्वी विद्‍या निकेतन और पूर्णा लर्निंग के छात्र उपस्थित हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। शुभ दीप का प्रज्ज्वलन प्राचार्या श्रीमती मंजू बालसुब्रमण्यम, उपप्राचार्या श्रीमती रेणु डीमरी और पंडित जी के सहयोगी श्रीमान राजेश और श्रीमान विजय घाटे के साथ अन्य गणमान्य अध्यापिकाओं ने किया। इसके साथ-साथ ही संगीतमयी प्रभात का प्रारंभ कक्षा आठ की छात्रा निधि शिनाँय के राग भैरव गायन के साथ हुआ।

राग भैरव की प्रस्तुति के पश्चात  श्रीमती मंजू ने पंडित जी का स्वागत नवपल्लवित तुलसी के पौधे के साथ किया और अपने बहुमूुल्य समय में से कुछ पल विद्‍यालय एवं विद्‍यार्थियों को निर्दिष्ट करने हेतु आभार व्यक्त किया। प्राचार्या द्‍वारा आभार अभिव्यक्ति के पश्चात पंडित जी का मंत्रमुग्ध करने वाला बाँसुरीवादन आरंभ हुआ। पंडित जी के साथ तबले पर श्रीमान विजय घाटे एवं बाँसुरी पर श्रीमान राजेश जी ने संगत दी।  इस आलौकिक कला का रसास्वादन छात्रों एवं अध्यापकों द्‍वारा मंत्रमुग्ध होकर किया गया और ऎसा प्रतीत हुआ मानो हम सब अपने अस्तित्व को भूल कर एक पल के लिए बाँसुरी की स्वर लहरियों के साथ झूल रहे थे और प्रकृति के अंग पेड़-पौधे, पक्षी इत्यादि भी स्तब्ध मंत्रमुग्ध होकर पंडित जी की कला का रसोपान कर रहे थे। हम में से हरेक श्रोता के लिए पंड़ित जी के सानिध्य में बिताए गए वो पल अमूल्य ही नहीं चिंरजीवी थे। पंडित जी की नैसर्गिक प्रतिभा सरल जीवन, व्यव्हार हममें से अधिकतर श्रोताओं को आनंदित कर गया। तत्पश्चात पंडित जी ने अपने सरल एवं उत्कृष्ट स्वभाव से विद्‍यार्थियों की जिज्ञासाओं को शांत किया। पंडित जी का असाधारण व्यक्तित्व सभी बच्चों के हृदय पटल पर अमिट छाप अंकित कर गया।

कार्यक्रम के अंत में हिंदी विभागाध्यक्षा श्रीमती निर्मल द्विवेदी एवं वरिष्ठ हिंदी अध्यापिका श्रीमती खेमकिरन द्‍वारा पंड़ितजी को काव्यमय धन्यवाद स्वचरित कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत किया और इसके साथ ही उपहार प्रदान किया गया। श्रीमती अनीता बाबू ने भी पंडितजी के सम्मान में चंद शब्द कहे।

आज की संगीतमय प्रभात विद्‍यालय के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी। ऎसे कार्यक्रम हमारे विद्‍यार्थियों में प्रेरणा का श्रोत बन कर उन्हें सदैव उन्नति पथ पर अग्रसर होकर असीम ऊँचाइयों तक पहुँचने के लिए प्रेरित करते रहेंगे और पंडितजी जैसे व्यक्तित्व उनकी इस जीवन यात्रा में सदैव उनका मार्गदर्शन करेंगे ।

 

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